होली की शुभकामनाएं | Holi Wishes in Hindi 2026

Updated: October 2026

होली रंगों, हंसी और प्यार का त्योहार है। यह दिन सर्दियों के अंत और बसंत के स्वागत का प्रतीक है, जब लोग पुरानी कड़वाहटें भुलाकर एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं। नीचे दिए गए होली की शुभकामनाएं और शायरी आप अपने दोस्तों, परिवार और खास लोगों को WhatsApp, Facebook, Instagram पर भेज सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

होली कब मनाई जाती है?

होली हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा के अगले दिन यानी मार्च के महीने में मनाई जाती है।

होली पर सबसे अच्छी शुभकामना क्या भेजें?

रंगों से भरी, मिठास और खुशी का संदेश देने वाली शुभकामनाएं भेजें — जो प्राप्त करने वाले के साथ आपके रिश्ते से मेल खाती हो।

क्या ये Holi wishes WhatsApp पर copy-paste हो सकती हैं?

हाँ, हर शायरी के नीचे Copy बटन है। एक क्लिक में text copy करके किसी भी app पर paste कर सकते हैं।

Best Holi Wishes In hindi


होली हमारे जीवन का एक खास दिन होता है। यह हमें जीवन के खूबसूरत पलों को याद करने का मौका देता है। इस खास दिन पर, अपने परिवार और दोस्तों को बधाई देने का सबसे अच्छा तरीका है - होली की बधाईयाँ।


होली की बधाईयाँ का उपयोग करके, आप अपने परिवार और दोस्तों को एक खूबसूरत अहसास दे सकते हैं। यह एक अच्छा तरीका है अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का और उन्हें आपके साथ खुशी मनाने का।


यहाँ कुछ होली की बधाईयाँ के उदाहरण हैं जो आप होली के दिन अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं:





आप इन बधाईयों के साथ एक खास और यादगार होली का अनुभव कर सकते हैं। इसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर शेयर करके, अपने दोस्तों को भी इस खूबसूरत दिन का हिस्सा बना सकते हैं।


हमेशा याद रखें, होली की बधाईयों में वह खास भावना होती है, जो शब्दों से व्यक्त नहीं की जा सकती।

होली का त्योहार भारत में फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस साल, यह 18 मार्च, को मनाया जाएगा.

नज़ीर अकबराबादी Shayari in Hindi

एक तरफ से रंग पड़ता, इक तरफ उड़ता गुलाल।
जिन्दगी की लज्जतें लाती हैं, होली की बहार।।
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Ek taraf se rang padta, ik taraf udta gulaal.
Zindagi ki lazzatein laati hain, Holi ki bahaar.
Poet: नज़ीर अकबराबादी
जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की।
और दफ़ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की।
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Jab phaagun rang jhamakte hon tab dekh bahaarein Holi ki.
Aur daf ke shor khadakte hon tab dekh bahaarein Holi ki.
Poet: नज़ीर अकबराबादी
तुम्हारे देख के मुंह पर गुलाल की लाली।
हमारे दिल को हुई हर तरह की खु़शहाली।
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Tumhaare dekh ke munh par gulaal ki laali.
Hamaare dil ko hui har tarah ki khushhaali.
Poet: नज़ीर अकबराबादी
उधर से रंग लिये आओ तुम इधर से हम।
गुलाल अबीर मलें मुंह पे होके खु़श हर दम।
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Udhar se rang liye aao tum idhar se hum.
Gulaal abeer malein munh pe hoke khush har dam.
Poet: नज़ीर अकबराबादी
वह शोख़ रंगीला जब आया, यां होली की कर तैयारी।
पोशाक सुनहरी, जेब बदन, और हाथ चमकती पिचकारी।
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Woh shokh rangeela jab aaya, yaan Holi ki kar taiyaari.
Poshaak sunahri, jeb badan, aur haath chamakti pichkaari.
Poet: नज़ीर अकबराबादी
कहीं तो रंग छिड़क कर कहें कि होली है।
कोई खुशी से ललक कर कहें कि होली है॥
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Kahin to rang chhidak kar kahein ki Holi hai.
Koi khushi se lalak kar kahein ki Holi hai.
Poet: नज़ीर अकबराबादी
अबीर फेंकें हैं तक कर कहें कि होली है।
गुलाल मलके लपक कर कहें कि होली है॥
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Abeer phenken hain tak kar kahein ki Holi hai.
Gulaal malke lapak kar kahein ki Holi hai.
Poet: नज़ीर अकबराबादी
जब खेली होली नंद ललन हँस हँस नंदगाँव बसैयन में।
नर नारी को आनन्द हुए खु़शवक्ती छोरी छैयन में॥
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Jab kheli Holi Nand Lalan hans hans Nandgaon basaiyan mein.
Nar naari ko aanand hue khushwaqti chhori chhaiyan mein.
Poet: नज़ीर अकबराबादी
जब श्याम ने राधा गोरी के इक भर कर मारी पिचकारी।
तब मुख पर छीटे आन पड़ी और भीज गई तन की सारी॥
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Jab Shyam ne Radha gori ke ik bhar kar maari pichkaari.
Tab mukh par chheente aan padi aur bheej gayi tan ki saari.
Poet: नज़ीर अकबराबादी
तेरी पिचकारी की तकदीद में ऐ गुल हर सुबह।
साथ ले निकले हैं सूरज की किरन पिचकारी।।
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Teri pichkaari ki takdeed mein ai gul har subah.
Saath le nikle hain sooraj ki kiran pichkaari.
Poet: नज़ीर अकबराबादी

मीराबाई Shayari in Hindi

होरी खेलत हैं गिरधारी।
मुरली चंग बजत डफ न्यारो।
Poet: मीराबाई
Hori khelat hain Girdhaari.
Murli chang bajat daf nyaro.
Poet: मीराबाई
भरि भरि मूठ गुलाल लाल संग
स्यामा प्राण पियारी।
Poet: मीराबाई
Bhari bhari mooth gulaal laal sang
Syama praan piyaari.
Poet: मीराबाई
फागुन के दिन चार होली खेल मना रे॥
बिन करताल पखावज बाजै अणहदकी झणकार रे।
Poet: मीराबाई
Phaagun ke din chaar Holi khel mana re.
Bin kartaal pakhaawaj baajai anhad ki jhanakaar re.
Poet: मीराबाई
सील संतोखकी केसर घोली प्रेम प्रीत पिचकार रे।
उड़त गुलाल लाल भयो अंबर, बरसत रंग अपार रे॥
Poet: मीराबाई
Seel santokh ki kesar gholi prem preet pichkaar re.
Udat gulaal laal bhayo ambar, barsat rang apaar re.
Poet: मीराबाई

सूरदास Shayari in Hindi

व्रज में हरि होरी मचाई ।
इततें आई सुघर राधिका उततें कुंवर कन्हाई ।
Poet: सूरदास
Vraj mein Hari Hori machaai.
Itte aayi sughar Radhika utte kunwar Kanhai.
Poet: सूरदास
पिय प्यारी केलैं जमुन तीर । भरि केसरि कुमकुम अरु अबीर ॥
घसि मृगमद चंदन अरु गुलाल । रँग भीने अरगज वस्त्र माल ॥
Poet: सूरदास
Piya pyaari kelain Jamun teer. Bhari kesari kumkum aru abeer.
Ghasi mrigmad chandan aru gulaal. Rang bheene argaj vastra maal.
Poet: सूरदास
डफ बाँसुरी रुंज अरु महुअरि, बाजत ताल मृदंग ।
अति आनंद मनोहर बानी, गावत उठति तरंग ॥
Poet: सूरदास
Daf baansuri runj aru mahuari, baajat taal mridang.
Ati aanand manohar baani, gaavat uthati tarang.
Poet: सूरदास
नंद नँदन बृषभानु किसोरी, मोहन राधा खेलत होरी ।
श्रीबृंदावन अतिहिं उजागर, बरन बरन नव दंपति भोरी ॥
Poet: सूरदास
Nand Nandan Brishbhaanu kishori, Mohan Radha khelat Hori.
Shri Brindavan atihin ujaagar, baran baran nav dampati bhori.
Poet: सूरदास

More Classic Shayari by Great Poets

गले मुझको लगा लो ऐ दिलदार होली में
बुझे दिल की लगी भी तो ऐ यार होली में
Poet: भारतेंदु हरिश्चंद्र
Gale mujhko laga lo ai dildaar Holi mein
Bujhe dil ki lagi bhi to ai yaar Holi mein
Poet: भारतेंदु हरिश्चंद्र
गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझको भी जमाने दो
मनाने दो मुझे भी जानेमन त्योहार होली में
Poet: भारतेंदु हरिश्चंद्र
Gulaabi gaal par kuchh rang mujhko bhi jamaane do
Manaane do mujhe bhi jaanemann tyohaar Holi mein
Poet: भारतेंदु हरिश्चंद्र
फागुन लाग्यौ सखि जब तें, तब तें ब्रजमंडल धूम मच्यौ है ।
नारि नवेली बचै नहीं एक, विसेष इहैं सबै प्रेम अँच्यौ है ॥
Poet: रसखान
Phaagun laagyau sakhi jab tein, tab tein Brajmandal dhoom machyau hai.
Naari naveli bache nahin ek, visesh inhein sabai prem anchyau hai.
Poet: रसखान
खेलत फाग सुहाग भरी, अनुरागहिं लालन क धरि कै ।
भारत कुंकुम, केसर की पिचकारिन में रंग को भरि कै ॥
Poet: रसखान
Khelat phaag suhaag bhari, anuraagahin laalan k dhari kai.
Bhaarat kunkum, kesar ki pichkaarin mein rang ko bhari kai.
Poet: रसखान
केशर की, कलि की पिचकारीः
पात-पात की गात सँवारी ।
Poet: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
Keshar ki, kali ki pichkaari
Paat-paat ki gaat sanwaari.
Poet: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
राग-पराग-कपोल किए हैं,
लाल-गुलाल अमोल लिए हैं
Poet: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
Raag-paraag-kapol kiye hain,
Laal-gulaal amol liye hain
Poet: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

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