गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं | Gudi Padwa Wishes in Hindi & Marathi

Updated: October 2026

गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र और कोंकण में मनाया जाने वाला नव वर्ष है — चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का पावन दिन। घरों के बाहर बाँस पर उलटा लोटा, नीम-आम के पत्ते और रेशमी कपड़ा सजाकर 'गुड़ी' खड़ी की जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गुड़ी पड़वा का मतलब क्या है?

यह संवत्सर के नए साल की शुरुआत और सृष्टि के निर्माण का प्रतीक है।

गुड़ी क्यों खड़ी करते हैं?

विजय, खुशहाली और बुरी शक्तियों को दूर रखने के प्रतीक के रूप में।

क्या यह सिर्फ़ महाराष्ट्र में है?

नहीं — कर्नाटक में 'युगादि', कश्मीर में 'नवरेह' के नाम से भी यही दिन मनता है।

Best Gudi Padwa wishes in hindi


गुडी पड़वा, हमारे जीवन का एक विशेष अवसर होता है। यह सिर्फ एक दिन नहीं होता, बल्कि यह एक अद्वितीय यात्रा होती है, जो हमें जीवन के सुंदर पलों को स्मरण करने का अवसर प्रदान करती है। इस विशेष अवसर पर, अपने परिवार और मित्रों को बधाई देने का सबसे अनूठा तरीका है - गुडी पड़वा की शुभकामनाएं।


गुडी पड़वा की शुभकामनाएं का उपयोग करके, आप अपने परिवार और मित्रों को एक अद्वितीय अनुभूति दे सकते हैं। यह एक सुंदर तरीका है अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का और उन्हें आपके साथ आनंदित करने का।


यहाँ कुछ गुडी पड़वा की शुभकामनाएं के उदाहरण हैं जो आप गुडी पड़वा के मौके पर अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा कर सकते हैं:





आप इन शुभकामनाएं के साथ एक अद्वितीय और यादगार गुडी पड़वा का अनुभव कर सकते हैं। इसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर शेयर करके, अपने मित्रों को भी इस सुंदर क्षण का हिस्सा बना सकते हैं।


हमेशा याद रखें, गुडी पड़वा की शुभकामनाएं में वह विशेष अनुभूति समाहित होती है, जो शब्दों से व्यक्त नहीं की जा सकती।


गुडी पड़वा का आयोजन भारत में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होता है। इस साल, यह 31 मार्च, को मनाया जाएगा.

जयशंकर प्रसाद Shayari in Hindi

बीती विभावरी जाग री!
अम्बर पनघट में डुबो रही
Poet: जयशंकर प्रसाद
Beeti vibhaavari jaag ri
Ambar panghat mein dubo rahi
Poet: जयशंकर प्रसाद
खग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा
किसलय का अंचल डोल रहा
Poet: जयशंकर प्रसाद
Khag-kul kul-kul-sa bol raha
Kisalay ka anchal dol raha
Poet: जयशंकर प्रसाद
लो यह लतिका भी भर ला‌ई-
मधु मुकुल नवल रस गागरी
Poet: जयशंकर प्रसाद
Lo yah latika bhi bhar laai
Madhu mukul naval ras gaagri
Poet: जयशंकर प्रसाद
अरुण यह मधुमय देश हमारा
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा
Poet: जयशंकर प्रसाद
Arun yah madhumay desh hamaara
Jahaan pahunch anjaan kshitij ko milta ek sahaara
Poet: जयशंकर प्रसाद
सरल तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर
छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा
Poet: जयशंकर प्रसाद
Saral taamaras garbh vibha par, naach rahi tarushikha manohar
Chhitka jeevan hariyaali par, mangal kunkum saara
Poet: जयशंकर प्रसाद
है कहीं कोकिल सघन सहकार को कूंजित किये
और भी शतपत्र को मधुकर कही गुंजित किये
Poet: जयशंकर प्रसाद
Hai kahin kokil saghan sahkaar ko koonjit kiye
Aur bhi shatpatr ko madhukar kahi gunjit kiye
Poet: जयशंकर प्रसाद

नज़ीर अकबराबादी Shayari in Hindi

बुलबुलें चहकारती हैं शाखे़ गुल पर जाा बजा
बुलबुलें क्या फ़िलहक़ीकत चहचहाती है बहार
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Bulbulen chahkaarti hain shaakh-e-gul par ja-ba-ja
Bulbulen kya fil-haqeeqat chahchahaati hai bahaar
Poet: नज़ीर अकबराबादी
जहां में फिर हुई ऐ ! यारों आश्कार बसंत
हुई बहार के तौसन पै अब सवार बसंत
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Jahaan mein phir hui ae yaaron aashkaar basant
Hui bahaar ke tausan pe ab sawaar basant
Poet: नज़ीर अकबराबादी
जहां में आयी बहार और खिजां के दिन भूले
चमन में गुल खिले और वन में राय वन फूले
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Jahaan mein aayi bahaar aur khizaan ke din bhoole
Chaman mein gul khile aur van mein raay-van phoole
Poet: नज़ीर अकबराबादी
दरख्त झाड़ हर इक पात झाड़ लहराए
गुलों के सर पै बुलबुलों के मंडराए
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Darakht jhaad har ik paat jhaad lahraaye
Gulon ke sar pai bulbulon ke mandraaye
Poet: नज़ीर अकबराबादी
खु़श बैठे हैं सब शाहो वजीर आज अहा हा!
दिल शाद हैं अदनाओ फ़क़ीर आज अहा हा!
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Khush baithe hain sab shaaho wazeer aaj aha ha
Dil shaad hain adnaa-o-faqeer aaj aha ha
Poet: नज़ीर अकबराबादी

सुभद्राकुमारी चौहान Shayari in Hindi

देखो कोयल काली है पर
मीठी है इसकी बोली
Poet: सुभद्राकुमारी चौहान
Dekho koyal kaali hai par
Meethi hai iski boli
Poet: सुभद्राकुमारी चौहान
इसने ही तो कूक कूक कर
आमों में मिश्री घोली
Poet: सुभद्राकुमारी चौहान
Isne hi to kook kook kar
Aamon mein mishri gholi
Poet: सुभद्राकुमारी चौहान
कोयल कोयल सच बतलाना
क्या संदेसा लायी हो
Poet: सुभद्राकुमारी चौहान
Koyal koyal sach batlaana
Kya sandesa laayi ho
Poet: सुभद्राकुमारी चौहान
बहुत दिनों के बाद आज फिर
इस डाली पर आई हो
Poet: सुभद्राकुमारी चौहान
Bahut dinon ke baad aaj phir
Is daali par aayi ho
Poet: सुभद्राकुमारी चौहान

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला Shayari in Hindi

सखि वसन्त आया
भरा हर्ष वन के मन
Poet: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
Sakhi, vasant aaya
Bhara harsh van ke man
Poet: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
किसलय-वसना नव-वय-लतिका
मिली मधुर प्रिय-उर तरु-पतिका
Poet: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
Kisalay-vasana nav-vay-latika
Mili madhur priy-ur taru-patika
Poet: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
स्वर्ण-शस्य-अंचल
पृथ्वी का लहराया
Poet: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
Swarn-shasya-anchal
Prithvi ka lahraaya
Poet: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

More Classic Shayari by Great Poets

तहाँ मधु-काज आइ बैठे मधुकर पुंज
मलय पवन उपवन - बन धाए हैं
Poet: सेनापति
Tahaan madhu-kaaj aai baithe madhukar punj
Malay pavan upvan-van dhaaye hain
Poet: सेनापति
प्रथम वसंत नवल ऋतु आई । सुऋतु चैत बैसाख सोहाई
चंदन चीर पहिरि धरि अंगा । सेंदुर दीन्ह बिहँसि भरि मंगा
Poet: मलिक मोहम्मद जायसी
Pratham vasant naval ritu aai
Suritu Chait Baisakh sohaai
Poet: मलिक मोहम्मद जायसी
जिन्ह घर कंता ऋतु भली, आव बसंत जो नित्त
सुख भरि आवहिं देवहरै, दुःख न जानै कित्त
Poet: मलिक मोहम्मद जायसी
Jinh ghar kanta ritu bhali, aav basant jo nitt
Sukh bhari aavahin devharai, dukh na jaanai kitt
Poet: मलिक मोहम्मद जायसी
सदा बसंत रहत जहँ बास । सदा हर्ष,जहँ नहीं उदास
कोकिल कीर सदा तहँ रोर । सदा रूप मन्मथ चितचोर
Poet: सूरदास
Sada basant rahat jahan baas
Sada harsh, jahan nahin udaas
Poet: सूरदास

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