लोहड़ी की शुभकामनाएं | Lohri Wishes in Hindi & Punjabi
Updated: October 2026
लोहड़ी पंजाब का सबसे जोशीला त्योहार है — सर्दियों की विदाई और फसल कटाई का जश्न। आग के चारों ओर भांगड़ा, 'सुंदर मुंदरिये' की धुन और गुड़-तिल की मिठास इस दिन को खास बनाती है। नीचे दी गई शुभकामनाएं उत्तर भारत की रौनक को आपके phone तक पहुंचाएंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लोहड़ी क्यों मनाते हैं?
यह सर्दी की रात की लंबाई कम होने और रबी फसल की पहली कटाई का प्रतीक है।
नवविवाहित जोड़े को कैसे wish करें?
पहली लोहड़ी विशेष होती है — उनकी नई शुरुआत के लिए विशेष शुभकामना भेजें।
बच्चे की पहली लोहड़ी पर क्या?
परिवार में बच्चे के स्वागत और उज्जवल भविष्य की कामना वाला message।
Best Lohri Wishes in hindi
लोहड़ी हमारे जीवन का एक खास दिन होता है। यह हमें जीवन के खूबसूरत पलों को याद करने का मौका देता है। इस खास दिन पर, अपने परिवार और दोस्तों को बधाई देने का सबसे अच्छा तरीका है - लोहड़ी की बधाईयाँ।
लोहड़ी की बधाईयाँ का उपयोग करके, आप अपने परिवार और दोस्तों को एक खूबसूरत अहसास दे सकते हैं। यह एक अच्छा
तरीका है अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का और उन्हें आपके साथ खुशी मनाने का।
यहाँ कुछ लोहड़ी की बधाईयाँ के उदाहरण हैं जो आप लोहड़ी के दिन अपने परिवार और दोस्तों के
साथ शेयर कर सकते हैं:
आप इन बधाईयों के साथ एक खास और यादगार लोहड़ी का अनुभव कर सकते हैं। इसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स
पर शेयर करके, अपने दोस्तों को भी इस खूबसूरत दिन का हिस्सा बना सकते हैं।
हमेशा याद रखें, लोहड़ी की बधाईयों में वह खास भावना होती है, जो शब्दों से व्यक्त नहीं की जा सकती।
लोहड़ी का आयोजन भारत में माघ मास की अमावस्या को होता है। इस साल, यह 13 जनवरी, 2024 को मनाया जाएगा[.
लोहड़ी पंजाब का उपज त्योहार है। यह अग्नि (आग) और सूर्य देवता के प्रति प्रार्थना और कृतज्ञता व्यक्त करने के आसपास घूमता है, जिन्होंने समृद्ध फसल की संभावना बनाई. पंजाब में मुख्य फसल गेहूं है, जो वर्षा ऋतु के बाद अक्टूबर में बोई जाती है और मार्च या अप्रैल में काटी जाती है.
लोहड़ी सर्दियों के अंत का संकेत देती है और लंबे दिनों का स्वागत करती है। लोहड़ी उत्तरी गोलार्ध में सूर्य के आगमन का स्वागत करने वाले भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी क्षेत्र के लोगों द्वारा मनाई जाती है. यह त्योहार रबी फसलों की कटाई से पारंपरिक रूप से जुड़ा हुआ है.
नज़ीर अकबराबादी Shayari in Hindi
जब माह अगहन का ढलता हो, तब देख बहारे जाड़े की और हँस हँस पूस संभलता हो, तब देख बहारे जाड़े की
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Jab maah aghan ka dhalta ho, tab dekh bahare jaade ki Aur hans hans poos sambhalta ho, tab dekh bahare jaade ki
Poet: नज़ीर अकबराबादी
दिन जल्दी जल्दी चलता हो, तब देख बहारे जाड़े की पाला भी बर्फ़ पिघलता हो, तब देख बहारे जाड़े की
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Din jaldi jaldi chalta ho, tab dekh bahare jaade ki Paala bhi barf pighalta ho, tab dekh bahare jaade ki
Poet: नज़ीर अकबराबादी
तन ठोकर मार पछाड़ा हो, दिल से होती हो कुश्ती सी थर-थर का ज़ोर अखाड़ा हो, बजती हो सबकी बत्तीसी
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Tan thokar maar pachhaada ho, dil se hoti ho kushti si Thar-thar ka zor akhaada ho, bajti ho sabki battisi
Poet: नज़ीर अकबराबादी
हर एक मकां में सर्दी ने, आ बांध दिया हो यह चक्कर जो हर दम कप-कप होती हो, हर आन कड़ाकड़ और थर-थर
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Har ek makaan mein sardi ne, aa baandh diya ho yeh chakkar Jo har dam kap-kap hoti ho, har aan kadakad aur thar-thar
Poet: नज़ीर अकबराबादी
हो फ़र्श बिछा गालीचों का और पर्दे छूटे हों आकर एक गर्म अंगीठी जलती हो और शमा हो रौशन तिस पर
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Ho farsh bichha galeechon ka aur parde chhoote hon aakar Ek garm angeethi jalti ho aur shama ho raushan tis par
Poet: नज़ीर अकबराबादी
जाड़ा तो अपने दिल में था पहलवां झझाड़ा पर एक तिल ने उसको रग-रंग से उखाड़ा
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Jaada to apne dil mein tha pahalwan jhajhaada Par ek til ne usko rag-rang se ukhaada
Poet: नज़ीर अकबराबादी
जिस दम दिलो जिगर को, सर्दी ने आ लताड़ा ख़म ठोंक बोहीं हमने जाड़े को धर पछाड़ा
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Jis dam dil-o-jigar ko, sardi ne aa lataada Kham thonk wahin hamne jaade ko dhar pachhaada
Poet: नज़ीर अकबराबादी
सेनापति Shayari in Hindi
सीत को प्रबल ‘सेनापति’ कोपि चढ्यो दल निबल अनल दूरि गयो सियराइ कै
Poet: सेनापति
Seet ko prabal 'Senapati' kopi chadhyo dal Nibal anal doori gayo siyaai kai
Poet: सेनापति
हिम के समीर तेई बरखै बिखम तीर रही है गरम भौन-कोननि में जाइ कै
Poet: सेनापति
Him ke sameer tei barkhai bikham teer Rahi hai garam bhaun-konani mein jaai kai
Poet: सेनापति
धूम नैन बहे , लोग होत हैं अचेत तऊ हिय सो लगाइ रहे नेक सुलगाइ कै
Poet: सेनापति
Dhoom nain bahe, log hot hain achet taoo Hiy so lagai rahe nek sulgaai kai