मकर संक्रांति की शुभकामनाएं | Makar Sankranti Wishes in Hindi
Updated: October 2026
मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य उत्तरायण होते हैं — दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। तिल-गुड़ की मिठास, पतंगों की रंगीन उड़ान और 'तिल गुड़ ल्या, गोड़ गोड़ बोला' की मधुर परंपरा इस दिन की पहचान है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मकर संक्रांति की तारीख क्यों नहीं बदलती?
यह सूर्य के राशि बदलने से जुड़ा है, चंद्र कैलेंडर से नहीं — इसलिए हर साल 14 या 15 जनवरी को आती है।
तिल-गुड़ क्यों खाते हैं?
तिल गर्मी देता है (सर्दी में फायदेमंद) और गुड़ रिश्तों में मिठास का प्रतीक है।
गुजरात में इसे क्या कहते हैं?
उत्तरायण — और वहां पतंग महोत्सव के रूप में बहुत बड़े स्तर पर मनाते हैं।
Best Makarsantri Wishes in hindi
मकर संक्रांति हमारे जीवन का एक खास दिन होता है। यह हमें जीवन के खूबसूरत पलों को याद करने का मौका देता है। इस खास दिन पर, अपने परिवार और दोस्तों को बधाई देने का सबसे अच्छा तरीका है - मकर संक्रांति की बधाईयाँ।
मकर संक्रांति की बधाईयाँ का उपयोग करके, आप अपने परिवार और दोस्तों को एक खूबसूरत अहसास दे सकते हैं। यह एक अच्छा
तरीका है अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का और उन्हें आपके साथ खुशी मनाने का।
यहाँ कुछ मकर संक्रांति की बधाईयाँ के उदाहरण हैं जो आप मकर संक्रांति के दिन अपने परिवार और दोस्तों के
साथ शेयर कर सकते हैं:
आप इन बधाईयों के साथ एक खास और यादगार मकर संक्रांति का अनुभव कर सकते हैं। इसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स
पर शेयर करके, अपने दोस्तों को भी इस खूबसूरत दिन का हिस्सा बना सकते हैं।
हमेशा याद रखें, मकर संक्रांति की बधाईयाँ में वह खास भावना होती है, जो शब्दों से व्यक्त नहीं की जा सकती।
मकर संक्रांति का आयोजन भारत में माघ मास की अमावस्या के एक दिन पहले होता है। इस साल, यह 14 जनवरी, 2024 को मनाया जाएगा.
मकर संक्रांति का महत्व भारतीय संस्कृति में बहुत अधिक है। यह त्योहार सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने के दिन मनाया जाता है. यह त्योहार भारत के हर हिस्से में विशेष धूमधाम से मनाया जाता है.
मकर संक्रांति के दिन, लोग भगवान सूर्य की पूजा करते हैं, भजन और कीर्तन करते हैं, और रात में जगरण रखते हैं. यह त्योहार भारत के हर हिस्से में विशेष धूमधाम से मनाया जाता है.
मकर संक्रांति के दिन, लोग भगवान सूर्य की पूजा करते हैं, भजन और कीर्तन करते हैं, और रात में जगरण रखते हैं. यह त्योहार भारत के हर हिस्से में विशेष धूमधाम से मनाया जाता है.
नज़ीर अकबराबादी Shayari in Hindi
यां जिन दिनों में होता है आना पतंग का ठहरे हैं हर मकां में बनाना पतंग का
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Yaan jin dinon mein hota hai aana patang ka Thehre hain har makaan mein banaana patang ka
Poet: नज़ीर अकबराबादी
हर लहज़ा इस बहार से उड़ता है ललपरा बुलबुल समझ के गुल जिसे हो जावे मुब्तिला
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Har lahza is bahaar se udta hai lalpara Bulbul samajh ke gul jise ho jaave mubtila
Poet: नज़ीर अकबराबादी
उड़ते हैं इस हिजूम से कनकौए चमचके कौआ पकड़ने से गोया कौए हैं उड़ रहे
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Udte hain is hijoom se kanakauve chamchake Kauva pakadne se goya kauve hain ud rahe
Poet: नज़ीर अकबराबादी
और जो किसी से अपनी तुक्कल को लें बचा यानी है मांझा खूब मंझा उस की डोर का
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Aur jo kisi se apni tukkal ko len bacha Yaani hai maanjha khoob manjha us ki dor ka
Poet: नज़ीर अकबराबादी
लड़ते हैं जिस मकां में पतंग आन कर यहां होता बड़ा हुजूम है ग्यारस के रोज वां
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Ladte hain jis makaan mein patang aan kar yahaan Hota bada hujoom hai gyaaras ke roz vaan
Poet: नज़ीर अकबराबादी
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डोरों की गोली और पतंगें बहुत अयां सौ सौ खड़े इकट्ठें उड़ाते हैं शादमां
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Doron ki goli aur patangen bahut ayaan Sau sau khade ikatthe udate hain shaadmaan
Poet: नज़ीर अकबराबादी
कटता है जो पतंग तो फिर लूटने उसे दो-दो हज़ार दौड़ते हैं, छोटे और बड़े
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Katta hai jo patang to phir lootne use Do-do hazaar daudte hain, chhote aur bade
Poet: नज़ीर अकबराबादी
जाड़े में फिर खु़दा ने खिलवाए तिल के लड्डू हर एक खोंमचे में दिखलाए तिल के लड्डू
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Jaade mein phir khuda ne khilwaaye til ke laddu Har ek khomche mein dikhlaaye til ke laddu
Poet: नज़ीर अकबराबादी
कूचे गली में हर जा, बिकवाए तिल के लड्डू हमको भी हैगे दिल से, खुश आये तिल के लड्डू
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Koochey gali mein har ja, bikwaaye til ke laddu Hamko bhi haige dil se, khush aaye til ke laddu
Poet: नज़ीर अकबराबादी
तुलसीदास Shayari in Hindi
दीन दयालु दिवाकर देवा कर मुनि, मनुज, सुरासुर सेवा
Poet: तुलसीदास
Deen dayaalu Divaakar Deva Kar muni, manuj, suraasur seva
Poet: तुलसीदास
हिम तम-करि-केहरि करमाली दहन दोष दुख दुरित रूजाली
Poet: तुलसीदास
Him tam-kari-kehari karmaali Dahan dosh dukh durit rujaali
Poet: तुलसीदास
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कोक कोकनद लोक प्रकासी तेज प्रताप रूप् रस-रासी
Poet: तुलसीदास
Kok kokanad lok prakaasi Tej prataap roop ras-raasi
Poet: तुलसीदास
सारथि-पंगु, दिब्य रथ गामी हरि संकर बिधि मूरति स्वामी
Poet: तुलसीदास
Saarathi-pangu, dibya rath gaami Hari Sankar Bidhi moorati swaami
Poet: तुलसीदास
बेद पुरान प्रगट जस जागै तुलसी राम-भगति बर मांगै
Poet: तुलसीदास
Bed puraan pragat jas jaagai Tulsi Ram-bhagati bar maangai
Poet: तुलसीदास
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू
Poet: तुलसीदास
Jug sahastra jojan par Bhaanu Leelyo taahi madhur phal jaanu
Poet: तुलसीदास
More Classic Shayari by Great Poets
ओ रवि ! मुझको अपनी किरणों में जागृति दो शोभा दो और शक्ति दो
Poet: चन्द्रकुंवर बर्त्वाल
O Ravi! Mujhko apni kirnon mein jaagriti do Shobha do aur shakti do