मुहर्रम की मातमपुर्सी | Muharram Messages in Hindi & Urdu
Updated: October 2026
मुहर्रम इस्लामिक नववर्ष का पहला महीना और शोक का समय है — कर्बला में इमाम हुसैन की शहादत की याद। यह जश्न नहीं, बल्कि सच्चाई और न्याय के लिए दी गई कुर्बानी को सलाम करने का अवसर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Muharram पर 'Mubarak' कहना सही है?
नहीं — यह शोक का महीना है। 'श्रद्धांजलि' या 'Ya Hussain' जैसे शब्द उपयुक्त हैं।
ताज़िया क्यों निकाला जाता है?
इमाम हुसैन की कब्र की प्रतीकात्मक प्रतिकृति के रूप में, उनके बलिदान को याद करने के लिए।
क्या गैर-मुस्लिम भी श्रद्धा रख सकते हैं?
बिल्कुल — सच्चाई के लिए कुर्बानी हर इंसान के लिए प्रेरणा है।
Best Muharrum Wishes in hindi
मुहर्रम हर मुसलमान के जीवन में एक खास मौका होता है। यह एक दिन नहीं, बल्कि एक खास अनुभव का सफर है, जो
हमें इस्लाम के सुंदर मोमेंट्स को याद करने का अवसर देता है। इस खास मौके पर, अपने दोस्तों और
परिवारवालों को बधाई देने का सबसे प्यारा तरीका है - मुहर्रम की शुभकामनाएं।
मुहर्रम की शुभकामनाएं देकर, आप अपने चाहने वालों को एक सुंदर अहसास दिला सकते हैं। यह एक सुंदर
रूप है अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का और उन्हें आपके साथ हर्षित करने का।
यहाँ कुछ मुहर्रम की शुभकामनाएं के उदाहरण हैं जो आप मुहर्रम के मौके पर अपने दोस्तों और परिवारवालों के
साथ साझा कर सकते हैं:
आप इन शुभकामनाओं के साथ एक खास और यादगार मुहर्रम अनुभव कर सकते हैं। इसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स
पर शेयर करके, अपने दोस्तों को भी इस सुंदर क्षण का हिस्सा बना सकते हैं।
हमेशा याद रखें, मुहर्रम की शुभकामनाएं में छुपा है वह खास महसूस, जो शब्दों से कहा नहीं जा सकता।
मिर्ज़ा दबीर Shayari in Hindi
किस शेर की आमद है कि रन काँप रहा है रुस्तम का जिगर ज़ेर-ए-कफ़न काँप रहा है
Poet: मिर्ज़ा दबीर
Kis sher ki aamad hai ki ran kaanp raha hai Rustam ka jigar zer-e-kafan kaanp raha hai
Poet: मिर्ज़ा दबीर
शमशीर-बकफ़ देख के हैदर के पिसर को जिब्रील लरज़ते हैं समेटे हुए पर को
Poet: मिर्ज़ा दबीर
Shamsheer-bakaf dekh ke Haidar ke pisar ko Jibreel larazte hain samete hue par ko
Poet: मिर्ज़ा दबीर
राहत के महलों को बला पूछ रही है हस्ती के मकानों को फ़ना पूछ रही है
Poet: मिर्ज़ा दबीर
Raahat ke mahlon ko bala poochh rahi hai Hasti ke makaanon ko fana poochh rahi hai
Poet: मिर्ज़ा दबीर
यूसुफ़ है ये कुनआँ में सुलेमान है सबा में ईसा है मसीहाई में मूसा है दुआ में
Poet: मिर्ज़ा दबीर
Yusuf hai ye Kanaan mein Sulemaan hai Saba mein Isa hai maseehai mein Moosa hai dua mein
Poet: मिर्ज़ा दबीर
अय्यूब है ये सब्र में यहया है बका में शपीर है मज़लूमी में हैदर है वग़ा में
Poet: मिर्ज़ा दबीर
Ayyub hai ye sabr mein Yahya hai buka mein Shabbir hai mazloomi mein Haidar hai waga mein
Poet: मिर्ज़ा दबीर
क्या ग़म जो न मादर न पिदर रखते हैं आदम अब्बास सा दुनिया में पिसर रखते हैं आदम
Poet: मिर्ज़ा दबीर
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Kya gham jo na maadar na pidar rakhte hain Aadam Abbas sa duniya mein pisar rakhte hain Aadam
Poet: मिर्ज़ा दबीर
जौहर के दिखाने में ये शमशीर-ए-ख़ुदा है और सर के कटाने में ये शाह-ए-शोहदा है
Poet: मिर्ज़ा दबीर
Jauhar ke dikhane mein ye shamsheer-e-Khuda hai Aur sar ke katane mein ye Shah-e-Shohda hai
Poet: मिर्ज़ा दबीर
बे उन के शर्फ़ कुछ भी ज़माना नहीं रखता ईमान सिवा उन के ख़ज़ाना नहीं रखता
Poet: मिर्ज़ा दबीर
Be un ke sharf kuchh bhi zamana nahin rakhta Imaan siva un ke khazana nahin rakhta
Poet: मिर्ज़ा दबीर
हासिद से सुलह भी नहीं दरकार है मुझ को सरकार-ए-हुसैनी से सरोकार है मुझ को
Poet: मिर्ज़ा दबीर
Hasid se sulah bhi nahin darkaar hai mujh ko Sarkaar-e-Husaini se sarokaar hai mujh ko
Poet: मिर्ज़ा दबीर
मीर अनीस Shayari in Hindi
दश्त-ए-विग़ा में नूर-ए-ख़ुदा का ज़ुहूर है ज़र्रों में रौशनी-ए-तजल्ली-ए-तूर है
Poet: मीर अनीस
Dasht-e-Vigha mein noor-e-Khuda ka zuhoor hai Zarron mein raushni-e-tajalli-e-Toor hai
Poet: मीर अनीस
अल्लाह-रे हुस्न तबक़ा-ए-अम्बर-सरिश्त का मैदान-ए-कर्बला है नमूना बहिश्त का
Poet: मीर अनीस
Allah-re husn tabqa-e-ambar-sarisht ka Maidan-e-Karbala hai namuna bahisht ka
Poet: मीर अनीस
परतव-फ़गन हुआ जो रुख़-ए-क़िबला-ए-अनाम मशहूर हो गई वो ज़मीं अर्श-एहतिशाम
Poet: मीर अनीस
Partav-fagan hua jo rukh-e-qibla-e-anaam Mashhoor ho gayi woh zameen arsh-ehtisham
Poet: मीर अनीस
काबे से और नजफ़ से भी इज़्ज़त सिवा हुई ख़ाक उस ज़मीन-ए-पाक की ख़ाक-ए-शिफ़ा हुई
Poet: मीर अनीस
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Kaabe se aur Najaf se bhi izzat siva hui Khaak us zameen-e-paak ki khaak-e-shifa hui
Poet: मीर अनीस
ग़ुल था ज़हे हुसैन की शौकत ज़हे वक़ार गोया खड़े हैं जंग को महबूब-ए-किर्दगार
Poet: मीर अनीस
Ghul tha zahe Husain ki shaukat zahe waqaar Goya khade hain jang ko mahboob-e-kirdgaar
Poet: मीर अनीस
शम्अ-ए-हरीम-ए-लम-यज़ली था गुलू-ए-शाह तारीक शब में जैसे हुवैदा हो नूर-ए-माह
Poet: मीर अनीस
Sham-e-harim-e-lam-yazli tha gulu-e-Shah Taareek shab mein jaise huvaida ho noor-e-maah
Poet: मीर अनीस
ऐ चर्ख़-ए-बे-मदार ये कैसा सितम है आह शमशीर-ए-शिम्र और मोहम्मद की बोसा-गाह
Poet: मीर अनीस
Ae charkh-e-be-madaar ye kaisa sitam hai aah Shamsheer-e-Shimr aur Mohammad ki bosa-gaah
Poet: मीर अनीस
जिस पर रसूल होंटों को मलते हों प्यार से कट जाए कर्बला मैं वो ख़ंजर की धार से
Poet: मीर अनीस
Jis par Rasool honton ko malte hon pyaar se Kat jaaye Karbala mein woh khanjar ki dhaar se
Poet: मीर अनीस
More Classic Shayari by Great Poets
सिदक़-ए-ख़लील भी है इश्क़ सब्र-ए-हुसैन भी है इश्क़! म'अरका-ए-वजूद में बद्र ओ हुनैन भी है इश्क़!
Poet: अल्लामा इक़बाल
Sidq-e-Khaleel bhi hai ishq, sabr-e-Husain bhi hai ishq Ma'raka-e-wujood mein Badr o Hunain bhi hai ishq