Rose Day Shayari in Hindi | रोज़ डे शायरी 2026

Updated: October 2026

गुलाब प्यार का सबसे पुराना प्रतीक है। 7 फ़रवरी — Valentine's Week का पहला दिन — दुनियाभर में Rose Day के रूप में मनाया जाता है। एक गुलाब के साथ अगर आप एक खूबसूरत शायरी भी जोड़ दें, तो वो लम्हा हमेशा के लिए यादगार बन जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लाल, सफ़ेद, पीले गुलाब का क्या मतलब?

लाल = प्यार, सफ़ेद = शुद्धता/शुरुआत, पीला = दोस्ती।

Valentine Week में कौन-कौन से दिन हैं?

Rose, Propose, Chocolate, Teddy, Promise, Hug, Kiss, Valentine's Day — 7 से 14 फ़रवरी।

क्या Rose Day सिर्फ़ couples के लिए है?

नहीं — परिवार, दोस्तों को भी अलग रंग के गुलाब के साथ wish करें।

क्या मैं Rose Day शायरी WhatsApp status या Instagram caption में use कर सकता हूँ?

हाँ। हर शायरी के नीचे Copy और WhatsApp बटन हैं - एक क्लिक में कॉपी करें या सीधे शेयर करें।

क्या Rose Day शायरी Hindi और Hinglish दोनों में मिलती है?

हाँ, ज़्यादातर शायरी देवनागरी (Hindi) और Roman (Hinglish) दोनों में दी गई है, ताकि आप अपनी पसंद का रूप कॉपी कर सकें।

क्या शायरी पर शायर या अपलोड करने वाले का नाम दिया गया है?

हाँ। क्लासिक शायरों की शायरी पर शायर का नाम दिखता है, और यूज़र द्वारा अपलोड की गई शायरी पर अपलोड करने वाले का नाम।

Best Rose Day Shayari in Hindi


रोज़ डे वैलेंटाइन वीक का पहला दिन होता है, जो हर साल 7 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने प्यार का इज़हार करने के लिए गुलाब देते हैं। गुलाब प्यार और सुंदरता का प्रतीक है। रोज़ डे पर अपने प्रियजन को खास महसूस कराने के लिए यहाँ बेहतरीन रोज़ डे शायरी पढ़ें और शेयर करें।


गुलाब के साथ प्यार भरी शायरी भेजकर आप अपने दिल की बात कह सकते हैं। नीचे कुछ खूबसूरत रोज़ डे शायरी दी गई हैं जो आप व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं:



गुलाब देकर नहीं कहूंगा प्यार तुमसे,
बस एक गुलाब में सारी मोहब्बत भर दूंगा… हर पंखुड़ी पर तेरा नाम लिख दूंगा। 🌹❤️
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❤️ Rose Day
रोज़ डे पर ये गुलाब लो मेरी जान,
हर गुलाब में छुपी है मेरी प्यार भरी पहचान।
लाल गुलाब प्यार कहता है, तुम हो मेरी शान। 🌹
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❤️ Rose Day
न मिले दुनिया में कोई गुलाब इतना खूबसूरत,
जितना तेरी मुस्कान है यार।
रोज़ डे पर ये शायरी है तेरे नाम की उपहार। 🌹💕
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❤️ Rose Day
गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछा दूं तेरे रास्ते में,
रोज़ डे पर चलना हो जाए तेरे कदमों में बाग़।
तू है मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत सवाल। 🌹
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❤️ Rose Day
एक गुलाब तेरे नाम, एक गुलाब मेरे प्यार का इज़हार,
रोज़ डे पर सजा दिया दिल तेरे दर पर।
कबूल कर लो ये मोहब्बत हमारी। 🌹❤️
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❤️ Rose Day
दुनिया भर के गुलाब ले आऊं तेरे लिए,
पर तू तो खुद गुलाब से ज्यादा हसीन है।
रोज़ डे मुबारक हो मेरी जान। 🌹💖
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❤️ Rose Day
लाल गुलाब प्यार कहता है, पीला गुलाब दोस्ती की बात,
सफेद गुलाब शांति देता है।
मैं तो बस एक गुलाब हूं तेरे प्यार में खिला। 🌹
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❤️ Rose Day
रोज़ डे आया है मुबारक हो,
गुलाब सा प्यार तुम्हें चाहिए हो।
हर दिन तुम्हारा रोज़ डे हो, हर पल तुम्हारे नाम। 🌹💕
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❤️ Rose Day
गुलाब देखो तो याद आओ मुझे,
मैं देखूं तो गुलाब याद आए तुम।
रोज़ डे पर ये दुआ है कि हमेशा रहो तुम खुश। 🌹❤️
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❤️ Rose Day
वैलेंटाइन वीक की शुरुआत है आज रोज़ डे से,
गुलाब भेजो उसको जिससे है प्यार तुम्हें।
शायरी के साथ गुलाब बन जाएगा यादगार। 🌹💖
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❤️ Rose Day


रोज़ डे पर इन शायरी को अपने पार्टनर, क्रश या दोस्त के साथ शेयर करें। गुलाब और शायरी का कॉम्बो हर किसी का दिल जीत लेता है। हमेशा याद रखें, प्यार जताने का सबसे खूबसूरत तरीका है एक गुलाब और दिल की बात।


शायरी गार्डन पर और भी लव शायरी, सैड शायरी और मोटिवेशनल शायरी पढ़ सकते हैं। रोज़ डे मुबारक हो!

मीर तक़ी मीर Shayari in Hindi

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
Poet: मीर तक़ी मीर
Naazuki uske lab ki kya kahiye
Pankhudi ik gulaab ki si hai
Poet: मीर तक़ी मीर
फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे
पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत
Poet: मीर तक़ी मीर
Phool gul shams o qamar saare hi the
Par hamein un mein tumhi bhaye bahut
Poet: मीर तक़ी मीर
गुल हो महताब हो आईना हो ख़ुर्शीद हो मीर
अपना महबूब वही है जो अदा रखता हो
Poet: मीर तक़ी मीर
Gul ho mahtaab ho aaina ho khurshid ho Meer
Apna mehboob wahi hai jo ada rakhta ho
Poet: मीर तक़ी मीर
पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
Poet: मीर तक़ी मीर
Patta patta boota boota haal hamara jaane hai
Jaane na jaane gul hi na jaane baagh to saara jaane hai
Poet: मीर तक़ी मीर
कासा-ए-चश्म ले के जूँ नर्गिस
हम ने दीदार की गदाई की
Poet: मीर तक़ी मीर
Kaasa-e-chashm le ke joon nargis
Hum ne deedaar ki gadaai ki
Poet: मीर तक़ी मीर

जिगर मुरादाबादी Shayari in Hindi

जिसे सय्याद ने कुछ गुल ने कुछ बुलबुल ने कुछ समझा
चमन में कितनी मानी-ख़ेज़ थी इक ख़ामुशी मिरी
Poet: जिगर मुरादाबादी
Jise sayyaad ne kuchh gul ne kuchh bulbul ne kuchh samjha
Chaman mein kitni maani-khez thi ik khaamushi meri
Poet: जिगर मुरादाबादी
आबाद अगर न दिल हो तो बरबाद कीजिए
गुलशन न बन सके तो बयाबाँ बनाइए
Poet: जिगर मुरादाबादी
Aabaad agar na dil ho to barbaad keejiye
Gulshan na ban sake to bayaabaan banaiye
Poet: जिगर मुरादाबादी
गुलशन-परस्त हूँ मुझे गुल ही नहीं अज़ीज़
काँटों से भी निबाह किए जा रहा हूँ मैं
Poet: जिगर मुरादाबादी
Gulshan-parast hoon mujhe gul hi nahi azeez
Kaanton se bhi nibaah kiye ja raha hoon main
Poet: जिगर मुरादाबादी
फूल खिले हैं गुलशन गुलशन
लेकिन अपना अपना दामन
Poet: जिगर मुरादाबादी
Phool khile hain gulshan gulshan
Lekin apna apna daaman
Poet: जिगर मुरादाबादी

जलील मानिकपूरी Shayari in Hindi

आप छू देखें किसी ग़ुंचे को अपने हाथ से
ग़ुंचा गुल हो जाएगा और गुल चमन हो जाएगा
Poet: जलील मानिकपूरी
Aap chhu dekhein kisi ghunche ko apne haath se
Ghuncha gul ho jaayega aur gul chaman ho jaayega
Poet: जलील मानिकपूरी
सच पूछिए तो नाला-ए-बुलबुल है बे-ख़ता
फूलों में सारी आग लगाई सबा की है
Poet: जलील मानिकपूरी
Sach poochhiye to naala-e-bulbul hai be-khata
Phoolon mein saari aag lagaayi saba ki hai
Poet: जलील मानिकपूरी
जब से छूटा है गुलिस्ताँ हम से
रोज़ सुनते हैं बहार आई है
Poet: जलील मानिकपूरी
Jab se chhoota hai gulistaan hum se
Roz sunte hain bahaar aayi hai
Poet: जलील मानिकपूरी

हसरत मोहानी Shayari in Hindi

रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम
दहका हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम
Poet: हसरत मोहानी
Raushan jamaal-e-yaar se hai anjuman tamaam
Dahka hua hai aatish-e-gul se chaman tamaam
Poet: हसरत मोहानी
क़फ़स में हो दिल-ए-बुलबुल शहीद-ए-जल्वा-ए-गुल
ख़िज़ाँ ने जो न किया था वो अब बहार करे
Poet: हसरत मोहानी
Qafas mein ho dil-e-bulbul shaheed-e-jalwa-e-gul
Khizaan ne jo na kiya tha wo ab bahaar kare
Poet: हसरत मोहानी
आईने में वो देख रहे थे बहार-ए-हुस्न
आया मिरा ख़याल तो शर्मा के रह गए
Poet: हसरत मोहानी
Aaine mein wo dekh rahe the bahaar-e-husn
Aaya mera khayal to sharma ke reh gaye
Poet: हसरत मोहानी

More Classic Shayari by Great Poets

तश्बीह तिरे चेहरे को क्या दूँ गुल-ए-तर से
होता है शगुफ़्ता मगर इतना नहीं होता
Poet: अकबर इलाहाबादी
Tashbeeh tere chehre ko kya doon gul-e-tar se
Hota hai shagufta magar itna nahi hota
Poet: अकबर इलाहाबादी
हमें नर्गिस का दस्ता ग़ैर के हाथों से क्यूँ भेजा
जो आँखें ही दिखानी थीं दिखाते अपनी नज़रों से
Poet: शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
Hamein nargis ka dasta ghair ke haathon se kyun bheja
Jo aankhein hi dikhaani thi dikhaate apni nazron se
Poet: शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
नाज़ है गुल को नज़ाकत पे चमन में ऐ 'ज़ौक़'
उस ने देखे ही नहीं नाज़-ओ-नज़ाकत वाले
Poet: शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
Naaz hai gul ko nazaakat pe chaman mein ae 'Zauq'
Usne dekhe hi nahi naaz-o-nazaakat waale
Poet: शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
ख़ुदा के वास्ते गुल को न मेरे हाथ से लो
मुझे बू आती है इस में किसी बदन की सी
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Khuda ke waaste gul ko na mere haath se lo
Mujhe boo aati hai is mein kisi badan ki si
Poet: नज़ीर अकबराबादी
कूचे में उस के बैठना हुस्न को उस के देखना
हम तो उसी को समझे हैं बाग़ भी और बहार भी
Poet: नज़ीर अकबराबादी
Kooche mein uske baithna husn ko uske dekhna
Hum to usi ko samjhe hain baagh bhi aur bahaar bhi
Poet: नज़ीर अकबराबादी
काँटों से दिल लगाओ जो ता-उम्र साथ दें
फूलों का क्या जो साँस की गर्मी न सह सकें
Poet: अख़्तर शीरानी
Kaanton se dil lagao jo ta-umr saath dein
Phoolon ka kya jo saans ki garmi na seh sakein
Poet: अख़्तर शीरानी
चमन में रहने वालों से तो हम सहरा-नशीं अच्छे
बहार आ के चली जाती है वीरानी नहीं जाती
Poet: अख़्तर शीरानी
Chaman mein rehne waalon se to hum sehra-nasheen achhe
Bahaar aa ke chali jaati hai veeraani nahi jaati
Poet: अख़्तर शीरानी
बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका
Poet: आरज़ू लखनवी
Buri sarisht na badli jagah badalne se
Chaman mein aa ke bhi kaanta gulaab ho na saka
Poet: आरज़ू लखनवी
बुलबुल को बाग़बाँ से न सय्याद से गिला
क़िस्मत में क़ैद लिक्खी थी फ़स्ल-ए-बहार में
Poet: बहादुर शाह ज़फ़र
Bulbul ko baaghbaan se na sayyaad se gila
Qismat mein qaid likkhi thi fasl-e-bahaar mein
Poet: बहादुर शाह ज़फ़र
बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल
कहते हैं जिस को इश्क़ ख़लल है दिमाग़ का
Poet: मिर्ज़ा ग़ालिब
Bulbul ke kaarobaar pe hain khanda-ha-e-gul
Kehte hain jis ko ishq khalal hai dimaagh ka
Poet: मिर्ज़ा ग़ालिब
ये आरज़ू थी तुझे गुल के रू-ब-रू करते
हम और बुलबुल-ए-बेताब गुफ़्तुगू करते
Poet: हैदर अली आतिश
Ye aarzoo thi tujhe gul ke roo-ba-roo karte
Hum aur bulbul-e-betaab guftugu karte
Poet: हैदर अली आतिश
चमन-ज़ार-ए-मोहब्ब्बत में ख़मोशी मौत है बुलबुल
यहाँ की ज़िंदगी पाबंदी-ए-रस्म-ए-फ़ुग़ाँ तक है
Poet: अल्लामा इक़बाल
Chaman-zaar-e-mohabbat mein khamoshi maut hai bulbul
Yahan ki zindagi paabandi-e-rasm-e-fughaan tak hai
Poet: अल्लामा इक़बाल
वो नग़्मा बुलबुल-ए-रंगीं-नवा इक बार हो जाए
कली की आँख खुल जाए चमन बेदार हो जाए
Poet: असग़र गोंडवी
Wo naghma bulbul-e-rangeen-nawa ik baar ho jaaye
Kali ki aankh khul jaaye chaman bedaar ho jaaye
Poet: असग़र गोंडवी
देख ले बुलबुल ओ परवाना की बेताबी को
हिज्र अच्छा न हसीनों का विसाल अच्छा है
Poet: अमीर मीनाई
Dekh le bulbul o parwaana ki betaabi ko
Hijr achha na haseenon ka visaal achha hai
Poet: अमीर मीनाई
दिल के दो हिस्से जो कर डाले थे हुस्न-ओ-इश्क़ ने
एक सहरा बन गया और एक गुलशन हो गया
Poet: नूह नारवी
Dil ke do hisse jo kar daale the husn-o-ishq ne
Ek sehra ban gaya aur ek gulshan ho gaya
Poet: नूह नारवी
दिमाग़ दे जो ख़ुदा गुलशन-ए-मोहब्बत में
हर एक गुल से तिरे पैरहन की बू आए
Poet: मुंशी अमीरुल्लाह तस्लीम
Dimaagh de jo khuda gulshan-e-mohabbat mein
Har ek gul se tere pairahan ki boo aaye
Poet: मुंशी अमीरुल्लाह तस्लीम
शोख़ी से हर शगूफ़े के टुकड़े उड़ा दिए
जिस ग़ुंचे पर निगाह पड़ी दिल बना दिया
Poet: रियाज़ ख़ैराबादी
Shokhi se har shagufe ke tukde uda diye
Jis ghunche par nigaah padi dil bana diya
Poet: रियाज़ ख़ैराबादी
अशआ'र मेरे सुन के वो ख़ामोश हो गया
ग़ुंचे ब-रंग-ए-गुल हमा-तन गोश हो गया
Poet: मुनीर शिकोहाबादी
Ash'aar mere sun ke wo khaamosh ho gaya
Ghunche ba-rang-e-gul hama-tan gosh ho gaya
Poet: मुनीर शिकोहाबादी
गुल ही इस बाग़ से जाने पे नहीं बैठा कुछ
गठरी ग़ुंचे ने भी अज़-बहर-ए-सफ़र बाँधी है
Poet: मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
Gul hi is baagh se jaane pe nahi baitha kuchh
Gathri ghunche ne bhi az-bahr-e-safar baandhi hai
Poet: मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
जब ग़ुंचे ने सर अपना गरेबाँ से निकाला
बुलबुल ने क़दम फिर न गुलिस्ताँ से निकाला
Poet: चंदू लाल बहादुर शादान
Jab ghunche ne sar apna gareybaan se nikaala
Bulbul ne qadam phir na gulistaan se nikaala
Poet: चंदू लाल बहादुर शादान
जब ग़ुंचे को वाशुद हुई तहरीक सबा से
बुलबुल से अजब क्या जो करे नग़्मा-सराई
Poet: इस्माइल मेरठी
Jab ghunche ko waa-shud hui tehreek saba se
Bulbul se ajab kya jo kare naghma-saraai
Poet: इस्माइल मेरठी
ये हसरत रह गई क्या क्या मज़े से ज़िंदगी करते
अगर होता चमन अपना गुल अपना बाग़बाँ अपना
Poet: मज़हर मिर्ज़ा जान-ए-जानाँ
Ye hasrat reh gayi kya kya maze se zindagi karte
Agar hota chaman apna gul apna baaghbaan apna
Poet: मज़हर मिर्ज़ा जान-ए-जानाँ
गुल के होने की तवक़्क़ो पे जिए बैठी है
हर कली जान को मुट्ठी में लिए बैठी है
Poet: मह लक़ा चंदा
Gul ke hone ki tawaqqo pe jiye baithi hai
Har kali jaan ko mutthi mein liye baithi hai
Poet: मह लक़ा चंदा
कभी सय्याद का खटका है कभी ख़ौफ़-ए-ख़िज़ाँ
बुलबुल अब जान हथेली पे लिए बैठी है
Poet: मह लक़ा चंदा
Kabhi sayyaad ka khatka hai kabhi khauf-e-khizaan
Bulbul ab jaan hatheli pe liye baithi hai
Poet: मह लक़ा चंदा
तेरे आने से यू ख़ुशी है दिल
जूँ कि बुलबुल बहार की ख़ातिर
Poet: शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
Tere aane se yun khushi hai dil
Joon ki bulbul bahaar ki khaatir
Poet: शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
ख़लल इक पड़ गया नाहक़ गुल ओ बुलबुल की सोहबत में
अबस खोला था तू ने बाग़ में ऐ गुल बदन अपना
Poet: जुरअत क़लंदर बख़्श
Khalal ik pad gaya naahaq gul o bulbul ki sohbat mein
Abas khola tha tune baagh mein ae gul badan apna
Poet: जुरअत क़लंदर बख़्श
गुल-ओ-गुलचीं का गिला बुलबुल-ए-ख़ुश-लहजा न कर
तू गिरफ़्तार हुई अपनी सदा के बाइ'स
Poet: अल्ताफ़ हुसैन हाली
Gul-o-gulchein ka gila bulbul-e-khush-lahja na kar
Tu giraftaar hui apni sada ke baais
Poet: अल्ताफ़ हुसैन हाली
ग़ुंचे नीं इस बहार में कडवाया अपना दिल
बुलबुल चमन में फूल के गाई बसंत रुत
Poet: आबरू शाह मुबारक
Ghunche ne is bahaar mein kadvaaya apna dil
Bulbul chaman mein phool ke gaayi basant rut
Poet: आबरू शाह मुबारक
मैं बाग़ में हूँ तालिब-ए-दीदार किसी का
गुल पर है नज़र ध्यान में रुख़्सार किसी का
Poet: तअशशुक़ लखनवी
Main baagh mein hoon talib-e-deedaar kisi ka
Gul par hai nazar dhyaan mein rukhsaar kisi ka
Poet: तअशशुक़ लखनवी

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